मोहम्मद सईद
शहडोल 13 जुलाई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन विद्यालय, ताला में मध्यप्रदेश के वन विभाग के श्वान दलों का सात दिवसीय राज्य स्तरीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण एवं वार्षिक समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रदेश स्तर पर आयोजित होने वाला सातवां वार्षिक प्रशिक्षण एवं समीक्षा कार्यक्रम है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न वन वृत्तों एवं संरक्षित क्षेत्रों से कुल 13 श्वान दल भाग लेंगे। वन्य जीव अपराधों की रोकथाम एवं वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न वन वृत्तों एवं संरक्षित क्षेत्रों माधव, सतपुड़ा, वीरांगना दुर्गावती, कान्हा, पन्ना, पेंच, संजय टाइगर रिजर्व, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य सहित रीवा, छिंदवाड़ा और बालाघाट से संचालित श्वान दल शामिल होंगे।
सात दिवसीय प्रशिक्षण को दो चरणों (बैच) में आयोजित किया जाएगा, जिसमें श्वान दलों की कार्यकुशलता को आधुनिक तकनीकों के अनुरूप उन्नत किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान सभी श्वानों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा तथा प्रत्येक श्वान दल अपने कार्य अनुभव एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देगा। इसके अतिरिक्त वन्यजीव अपराधों की जांच एवं आरोपियों की धर पकड़ से संबंधित मॉक ड्रिल, ट्रैकिंग अभ्यास, सेंट डिस्क्रिमिनेशन, सूटकेस सर्च, ऑबीडियंस ड्रिल सहित विभिन्न व्यावहारिक अभ्यास आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर्स अपने प्रशिक्षित श्वानों द्वारा विशेष प्रदर्शन भी प्रस्तुत करेंगे।
2010 में हुई श्वान दलों की स्थापना
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ अनुपम सहाय ने "खबरें अभी तक" को बताया कि मध्य प्रदेश वन विभाग में श्वान दलों की स्थापना अगस्त 2010 में की गई थी। इस महत्वपूर्ण पहल में TRAFFIC, सीमा सुरक्षा बल (BSF), टेकनपुर तथा मध्यप्रदेश पुलिस का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों में 18 श्वान दल सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इनका संचालन सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के मार्गदर्शन में किया जाता है, जबकि प्रत्येक श्वान दल का प्रभारी वन क्षेत्रपाल स्तर का अधिकारी होता है तथा श्वानों का प्रशिक्षण एवं संचालन वनरक्षक एवं वनपाल द्वारा किया जाता है।
डॉ. सहाय ने बताया कि वर्तमान समय में वन्यजीव अपराध संगठित अपराधों का स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं। ऐसे अपराधों की जांच, आरोपियों का पीछा करने, वन्यजीवों के अवशेष, ट्रॉफी एवं अन्य साक्ष्यों की खोज में श्वान दल अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदेश के श्वान दल अब तक 185 से अधिक वन्यजीव अपराधों की सफल जांच में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर चुके हैं तथा 570 से अधिक वन्यजीव अपराधियों की गिरफ्तारी में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही है।
इन सभी का देंगे प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के वरिष्ठ वन अधिकारी, विशेषज्ञ प्रशिक्षक एवं मास्टर ट्रेनर्स श्वान दलों को नवीनतम तकनीकों, अपराध अनुसंधान की आधुनिक कार्य प्रणालियों तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण से अवगत कराएंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध मध्यप्रदेश वन विभाग की जांच एवं प्रवर्तन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगा।
इस सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन एवं तकनीकी मार्गदर्शन राजा खरे, प्रभारी अधिकारी, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, क्षेत्रीय इकाई जबलपुर के निर्देशन में किया जाएगा। प्रशिक्षण में जसवंत बर्मन पूर्व बीएसएफ अधिकारी एवं डॉग इंस्ट्रक्टर, जबलपुर, कैलाश चरार वनरक्षक एवं वरिष्ठ डॉग हैंडलर, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, क्षेत्रीय इकाई जबलपुर मास्टर ट्रेनर के रूप में श्वान दलों को आधुनिक ट्रैकिंग, अपराध अनुसंधान, सेंट डिटेक्शन एवं अन्य विशेष कौशलों का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
तैयारी को लेकर हुई बैठक
कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से क्षेत्र संचालक कार्यालय, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने की। बैठक में उप संचालक योहान कटारा, राजा खरे प्रभारी अधिकारी स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, क्षेत्रीय इकाई जबलपुर, जसवंत बर्मन, भूतपूर्व बीएसएफ डॉग इंस्ट्रक्टर, जबलपुर, कैलाश चरार, वनरक्षक एवं वरिष्ठ डॉग हैंडलर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स क्षेत्रीय इकाई जबलपुर, उप वन मंडलाधिकारी पनपथा तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के समस्त संबंधित वन परिक्षेत्राधिकारी उपस्थित रहे।


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