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11 दिन के जद्दोजहद के बाद मिली बांधवगढ़ की लापता बाघिन

मोहम्मद सईद

शहडोल 12 जुलाई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र की कॉलर लगी मादा बाघिन के अचानक लापता हो जाने से चिंता का माहौल बन गया था। बाघिन की तलाश के लिए विभाग ने तत्काल विशेष सर्च अभियान शुरू किया। 11 दिनों के अथक प्रयास, हाथियों की मदद से जंगल में सघन गश्त और कैमरा ट्रैप की निगरानी के बाद आखिरकार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम ने लापता बाघिन को सुरक्षित खोज निकाला। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार कॉलर लगी उक्त मादा बाघिन की जीपीएस/वीएचएफ लोकेशन 1 जुलाई की दोपहर लगभग 2 बजे के बाद से प्राप्त नहीं हो रही थी। लोकेशन प्राप्त न होने पर उसी दिन  से ही वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में पाँच सुरक्षा श्रमिकों एवं बीट गार्डों के दल द्वारा बाघिन के विचरण क्षेत्र में सघन गश्त एवं खोज अभियान चलाया गया, किंतु पूरे दिन के प्रयासों के बाद भी बाघिन का पता नहीं चल सका। इसके बाद पांच-पांच सदस्यों की तीन अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इन टीमों द्वारा  क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया किंतु बाघिन की लोकेशन प्राप्त नहीं हो सकी।


हाथियों से सघन गश्त और कैमरा ट्रैप 

जानकारी के अनुसार स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं  मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ.अनुपम सहाय द्वारा एक विशेष खोज दल का गठन किया गया, जिसमें बांधवगढ़ के वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर तथा वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के डॉ. प्रशांत देशमुख को भी शामिल किया गया। खोज अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दो प्रशिक्षित हाथियों एवं उनके महावतों की सहायता ली गई तथा वीएचएफ सर्च हेतु रिसीवर एंटीना की संख्या एक से बढ़ाकर चार कर दी गई, ताकि रेडियो सिग्नल के आधार पर इसका लोकेशन पता किया जा सके। इस सर्च अभियान में ट्रैप कैमरा को सभी सम्भावित स्थानों पर लगाया गया, ताकि बाघिन के मूवमेंट को कैप्चर किया जा सके। लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद उक्त बाघिन कैमरे में कैद नहीं हो सकी। 


पदचिन्ह ढूंढने का उठाया जोखिम

बताया जा रहा है, कि इसके बाद टीम ने
पदचिन्ह को ढूंढने जैसे जोखिम पूर्ण प्रयास का सहारा लिया। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई बार खोज अभियान बाधित हुआ, फिर भी सभी दलों ने निरंतर प्रयास जारी रखे और लगभग 100 वर्ग किलोमीटर  के वन क्षेत्र को सघनता से सर्च किया गया। सर्च अभियान में रविवार  को डॉग स्क्वाड को भी  शामिल किया गया और ग्रामीणों से प्राप्त होने वाली सूचनाओं का भी विश्लेषण किया गया। अंततः प्रयास रंग लाया और निडर खोजी दल ने सबसे पहले पदचिन्ह को ढूंढ निकाला। पदचिन्ह मिलने के बाद वहां हाथियों के दल को भेजा गया और 12 जुलाई को कॉलर वाली मादा बाघिन को उसके होम रेंज में ही हाथी के माध्यम से सफलता पूर्वक सर्च कर लिया गया। 

रेडियो कॉलर हो गया था बंद 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ.अनुपम सहाय ने "खबरें अभी तक" को बताया कि कॉलर वाली उक्त मादा बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ्य एवं सुरक्षित है। इसका रेडियो कॉलर पूरी तरह से कार्य करना बंद कर चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि अब भविष्य में इस बाघिन के मॉनिटरिंग के लिए भोपाल मुख्यालय से मार्गदर्शन प्राप्त करने की कार्यवाही की जा रही है। 
इस सफल अभियान ने एक बार फिर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की सतर्कता, तकनीकी निगरानी और टीम वर्क की प्रभाव शीलता को साबित किया है।

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