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देह दान कर दूसरों के लिए मिसाल बन गईं श्रीमती लीलम्मा

मोहम्मद सईद

बिलासपुर 31 जनवरी। देवलोक गमन एक शाश्वत सत्य है। किंतु कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनकी मृत्यु दूसरों के लिए एक उदाहरण बन जाती है। देह दान कर एक ऐसी ही मिसाल बन गई हैं श्रीमती के जी लीलम्मा। बिलासपुर के नूतन कॉलोनी, सरकंडा निवासी श्रीमती केजी लीलम्मा (पति स्वर्गीय पी.एस. नायर) ने जीवन के अंतिम क्षणों से पूर्व परिजनों से स्वेच्छा से देहदान करने की इच्छा व्यक्त की थी। और 30 जनवरी को जब श्रीमती लीलम्मा ने अपने जीवन की अंतिम सांस ली तो परिवार जनों ने उनकी इच्छा के अनुसार उनकी पार्थिव देह को छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स बिलासपुर के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति को सौंप दी। डॉ. मूर्ति ने इस पुनीत कार्य के संपादन के लिए शरीर रचना विज्ञान (एनाटॉमी) विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिक्षा जांगड़े को आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिसके बाद विभाग द्वारा सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद देहदान को विधिवत स्वीकार कर लिया। इस मौके पर श्रीमती लीलम्मा के पुत्र एस भारतीयन (मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक बिलासपुर) और डॉ श्रीमती सुप्रिया भारतीयन सहित परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

सिम्स एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने अपने अध्ययन की शुरुआत (कैडैवरिक ओथ) के अवसर पर यह शपथ ली की यह हमारे चिकित्सा जीवन के प्रथम गुरु हैं। हम इनके शरीर का पूरे सम्मान, श्रद्धा एवं मर्यादा के साथ अध्ययन कर एक कुशल एवं संवेदनशील चिकित्सक बनने का प्रयास करेंगे। यह परंपरा विद्यार्थियों में न केवल मानवीय संवेदनशीलता का संचार करती है, बल्कि देहदाता के प्रति गहन श्रद्धा और आभार भी व्यक्त करती है। इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ रमणेश मूर्ति, नोडल अधिकारी डॉ भूपेंद्र कश्यप डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. अमित कुमार डॉ निलेश महोबिया, श्रीमती संज्ञा टंडन (अरपा रेडियो) के साथ ही दिवंगत श्रीमती लीलम्मा के परिजन उपस्थित रहे।

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