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लोक अदालत ने सुलझाया 7 साल पुराना विवाद

मोहम्मद सईद

शहडोल 15 मार्च। एक मकान के मालिकाना हक को लेकर सात वर्षों से कोर्ट में चल रहा विवाद आपसी समझौते के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलझ गया। इस मामले में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समझौता करते हुए विवाद का निराकरण कर लिया। लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों और मध्यस्थों की पहल से मामला शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ। दोनों पक्षों ने निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि लोक अदालत के माध्यम से उन्हें त्वरित और सरल न्याय मिला। यह मामला अनूपपुर जिले का है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कोतमा तहसील के जमुना क्षेत्र में दो पड़ोसी परिवारों के बीच घर के मालिकाना हक को लेकर शुरू हुआ यह झगड़ा कोर्ट में पहुंचा था, जो हिंसक झड़पों तक पहुंच गया था। विवाद की शुरुआत 2019 में हुई जब पड़ोसी राठौर परिवारों ने एक ही संपत्ति पर दावा ठोका। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर घर पर कब्जा करने का आरोप लगाया, जिससे कई बार लाठी-डंडों से मारपीट और पुलिस हस्तक्षेप की नौबत आई। सात सालों में दर्जनों सुनवाईयों के बावजूद मामला सुलझा नहीं था, जिससे दोनों परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से त्रस्त हो चुके थे।

लोक अदालत है तेज समाधान

लोक अदालत में न्यायाधीश श्री अमनदीप सिंह छाबड़ा के प्रयासों से दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया और विस्तृत चर्चा तथा समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने समझौते पर सहमति व्यक्त की। समझौते के बाद दोनों पक्षों ने कहा, “7 साल की लड़ाई ने हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी थी। लोक अदालत ने हमें शांति दी। अब हम पड़ोसी की तरह रहेंगे।” यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लोक अदालत छोटे-बड़े विवादों का सबसे तेज और सस्ता समाधान है।


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