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गजराजों की छुट्टी, सेवा और सत्कार का पर्व शुरू

मोहम्मद सईद 
शहडोल 24 सितंबर। विश्व विख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गुरुवार को हाथियों की देखभाल, स्वास्थ्य एवं पुनर्यौवनीकरण को समर्पित हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप 2026 का भव्य शुभारंभ परासी गेट के समीप धमोखर बफर क्षेत्र में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कलेक्टर उमरिया श्रीमती राखी सहाय उपस्थित रहीं। आयोजन में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों तथा स्थानीय ग्रामीणों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में डीएफओ उमरिया विवेक सिंह, संभागीय प्रबंधक कॉरपोरेशन अमित पटौदी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ओहरिया, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक योहान कटारा सहित सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारी, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एवं स्थानीय रहवासी उपस्थित रहे।

हाथियों के विशेष देखभाल की दी जानकारी

कार्यक्रम की शुरुआत में सहायक संचालक धमोखर मितेन्द्र चिचखेड़े ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कार्यरत कैंप हाथियों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने हाथियों की विभिन्न गतिविधियों, वन विभाग के कार्यों में उनकी भूमिका तथा उनके संरक्षण एवं देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उप संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व योहान कटारा ने हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप 2026 की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस तरह का आयोजन हाथियों की नियमित कार्य-व्यवस्था से अलग उन्हें आराम, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल और विशेष सेवा प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। उन्होंने स्वयं पहली बार इस प्रकार के आयोजन का हिस्सा बनने को हर्ष एवं रोमांच से भरा अनुभव बताया।


कृष्णा ने खींचा सबका ध्यान
इस बार कैंप में शामिल हाथियों में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा नन्हा नर हाथी ‘कृष्णा’। अपनी चंचल अठखेलियों, उछलकूद और मासूम अंदाज से कृष्णा ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी गतिविधियां आयोजन के दौरान आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रहीं।
गौरतलब है कि कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था। बांधवगढ़ प्रवास के दौरान 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उसका नामकरण ‘कृष्णा’ किया था। महज कुछ महीनों में ही कृष्णा बांधवगढ़ के कैंप हाथियों के बीच एक खास पहचान बना चुका है।

15 में 9 पुनर्यौवनीकरण कैंप में शामिल
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक श्री कटारा ने बताया कि वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 15 कैंप हाथी कार्यरत हैं। इनमें से 4 हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन में तथा 2 हाथी हाथी अनुश्रवण कार्य में लगे हुए हैं। शेष 9 कैंप हाथियों को हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप 2026 में शामिल किया गया है।
कैंप के दौरान इन हाथियों को नियमित कार्य से विश्राम देने के साथ उनके स्वास्थ्य परीक्षण, पसंदीदा भोजन तथा विशेष देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य हाथियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से तरोताजा रखना भी है।

बफर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा

इस वर्ष हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप के आयोजन के लिए परासी गेट का चयन विशेष रूप से किया गया है। इसके पीछे उद्देश्य केवल कैंप हाथियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करना भी है। परासी और आसपास के ग्रामीणों को कैंप में शामिल होने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे हाथियों को करीब से देखने और उनके व्यवहार, देखभाल एवं संरक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

रेस्क्यू अभियान के चलते नहीं हो सके शामिल

इधर, मैहर वन मंडल के गोरसरी फॉरेस्ट क्षेत्र में हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन भी जारी है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के नेतृत्व में बांधवगढ़ के कैंप हाथियों, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तोमर तथा रेस्क्यू दल द्वारा रेस्क्यू कार्य प्रगति पर है। इसी कारण क्षेत्र संचालक, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, कुछ महावत-चारा कटर एवं रेस्क्यू टीम के सदस्य उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

हाथियों को करीब से समझने का मौका 

हाथी महोत्सव एवं हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप का मूल उद्देश्य केवल हाथियों को विश्राम देना नहीं, बल्कि पालतू हाथियों, महावतों और चारा कटरों को अवकाश प्रदान करने के साथ हाथियों के स्वास्थ्य की जांच, पौष्टिक एवं पसंदीदा आहार और विशेष सेवा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही यह आयोजन स्थानीय समुदाय को हाथियों को करीब से समझने, उनके व्यवहार एवं जीवनशैली के बारे में जानने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने का माध्यम भी है। बांधवगढ़ में आयोजित यह कैंप मानव और वन्यजीव के बीच सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने तथा संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। परासी बफर क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी और ग्रामीणों की भागीदारी ने इस आयोजन को वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ जन-जागरूकता का भी उत्सव बना दिया।

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