मोहम्मद सईद
शहडोल 10 अक्टूबर। बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की प्रसिद्ध एवं वन्यजीव प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बाघिन ‘डॉटी’ (Dotty) का 9 अक्टूबर को निधन हो गया। अपने लंबे और गौरवशाली जीवनकाल में डॉटी ने न केवल बांधवगढ़ के जंगलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, बल्कि अपनी संतानों के माध्यम से बाघों की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसकी जीवन यात्रा बांधवगढ़ के वन्यजीव संरक्षण इतिहास का एक यादगार अध्याय बन गई है।
मगधी जोन से शुरू हुआ सफर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार डॉटी का जन्म वर्ष 2011-12 में बांधवगढ़ के मगधी जोन में प्रसिद्ध बाघिन ‘पटिहा’ और नर बाघ ‘ब्लू आई’ की संतान के रूप में हुआ था। समय के साथ वह अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली प्रभावशाली बाघिन के रूप में उभरी। अपने जीवनकाल में उसने तीन से चार बार शावकों को जन्म दिया और उनका कुशलतापूर्वक पालन-पोषण किया। उसकी संतानों ने आगे चलकर बांधवगढ़ के जंगलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और बाघों की आबादी को समृद्ध बनाने में योगदान दिया।
अपनी ही मादा संतान द्वारा क्षेत्र से विस्थापित किए जाने के बाद डॉटी ने ताला जोन में नया ठिकाना बनाया। वहां उसने फिर से अपने जीवन का नया अध्याय शुरू किया और दो शावकों को जन्म दिया। परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने और अपने वंश को आगे बढ़ाने की उसकी क्षमता उसके जीवन की उल्लेखनीय विशेषताओं में शामिल रही।
मानपुर बफर क्षेत्र में मिला शव
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि 9 अक्टूबर को बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मानपुर बफर परिक्षेत्र के मझखेता बीट में हाथी से गश्ती के दौरान दोपहर बाद एक मादा बाघ का शव देखा गया। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप घटना स्थल को सुरक्षित कर घेराबंदी की गई तथा वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। उसी दिन शाम को डॉग स्क्वाड की सहायता से मृत बाघिन एवं आसपास के क्षेत्र की सघन जांच की गई। इस दौरान कोई संदिग्ध तथ्य सामने नहीं आया।
क्षेत्र संचालक डॉ. सहाय ने बताया कि
10 अक्टूबर को निर्धारित SOP के अनुसार सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी एवं विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शव विच्छेदन एवं पोस्टमार्टम की कार्रवाई की। संपूर्ण प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई। अग्रिम जांच के लिए आवश्यक नमूने संकलित कर विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक परीक्षण में मृत्यु का कारण प्रथम दृष्टया प्राकृतिक प्रतीत हुआ है।
दो शावक, वन प्रबंधन की निगरानी में
डॉटी के लगभग 15-16 माह आयु के दो शावक उससे अलग होकर क्षेत्र में विचरण करते हुए पाए गए हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन दोनों शावकों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रहा है, ताकि उनकी स्थिति एवं सुरक्षा पर आवश्यक ध्यान दिया जा सके। डॉटी के शावकों का सुरक्षित रहना और स्वतंत्र रूप से जीवन के अगले चरण में आगे बढ़ना वन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिशा में उनकी गतिविधियों पर सतत नजर रखी जा रही है।
संतानों में जीवित रहेगी डॉटी की विरासत
डॉटी का जाना बांधवगढ़ के जंगलों और उसे चाहने वाले वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक भावनात्मक क्षण है। उसने अपने जीवनकाल में मातृत्व, अनुकूलन क्षमता और वन्यजीवन की सहज जिजीविषा का परिचय दिया। उसकी संतानों के रूप में उसकी विरासत आज भी बांधवगढ़ के जंगलों में मौजूद है।
डॉटी अब जंगलों में विचरण करती हुई दिखाई नहीं देगी, लेकिन बांधवगढ़ की बाघ परंपरा, उसकी संतानों और संरक्षण की गौरवगाथा में उसका नाम सदैव याद रखा जाएगा।



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