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अब फिर राजस्व क्षेत्र में मृत मिला बाघ

मोहम्मद सईद

शहडोल 20 जनवरी। देश ही नहीं विदेश में भी बाघों को लेकर विख्यात हो चुके बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत है कि रूकने का नाम नहीं ले रही है। बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्य जीव प्रेमियों को भी चिंता में डाल दिया है। नए साल के शुरू होने से जनवरी की 20 तारीख तक यह चौथा मामला है।इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफ़र के बीट कुचवाही के कक्ष क्रमांक पी एफ 342 से लगभग 250 मीटर की दूरी पर  निजी राजस्व क्षेत्र, ग्राम गुरुवाही में 20 जनवरी मंगलवार को मादा बाघ का शव मिला है। मृत मिले इस मादा बाघ की उम्र लगभग 5 वर्ष बताई गई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार इस बाघ की मृत्यु का संभावित कारण आपसी द्वंद्व है। क्षेत्र संचालक के अनुसार मृत बाघ का पंचनामा तैयार कर स्थल संरक्षण किया गया और डॉग एस्कॉर्ट से शव तथा स्थल की जांच कराने के साथ ही मेटल डिटेक्टर से भी शव की जांच की गई है। उन्होंने बताया कि सक्षम वन्य चिकित्सको की उपस्थिति में विस्तृत पोस्टमॉर्टम परीक्षण किया गया। साथ ही नमूना संकलन भी किया गया है, जिसे परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजा जाएगा।  

लैंड आफ टाइगर्स कहे जाने वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इससे पहले धमोखर बफर क्षेत्र के समीप 16 जनवरी को एक मादा बाघ का शव मिला था, जिसकी उम्र लगभग 4 से 5 वर्ष बताई गई थी। इस बाघ का शव धमोखर बफ़र के बीट पिपरिया के कक्ष क्रमांक पी एफ 112 से लगभग 700 मीटर दूर निजी राजस्व क्षेत्र में मिला था। इस मामले में अधिकारियों ने बताया था कि विद्युत प्रवाह के दौरान सोलर फेंसिंग में उलझने से इस मादा बाघ की मौत हुई है। लेकिन अभी तक यह सवाल अनुत्तरित कि ये बाघ बिजली के तार में उलझ कर मर गया या उसे उलझा कर मार डाला गया।

वहीं इस घटना से पूर्व परिक्षेत्र ताला के बठान एंक्लोजर से 6 जनवरी को लगभग 7-8 माह का एक बाघ शावक निकलकर भाग गया था, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। इसी तरह 7 जनवरी को परिक्षेत्र ताला के कथली में मादा बाघ शावक का शव मिला था। इस शावक के शव दाह की प्रक्रिया पूरी भी नहीं हो पाई थी कि 8 जनवरी को धमोखर बफर जोन के कुदरी टोला में स्थित एक कुएं में मृत अवस्था में बाघ पड़ा हुआ मिला था। इस बाघ की उम्र लगभग 7-8 वर्ष थी। नए साल के शुरुआती दिनों में ही बाघों की लगातार मौत की खबर सामने आने से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में यदि इसी तरह से बाघों की मौत होती रही तो विख्यात हो चुके इस टाइगर रिजर्व को कुख्यात होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।

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