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तो क्या सिर्फ दिखावा है अवैध उत्खनन पर ‘एक्शन’

मोहम्मद सईद

शहडोल 19 फरवरी। उमरिया प्रशासन द्वारा अवैध खनिज उत्खनन के विरुद्ध कार्रवाई के बड़े दावे किए जा रहे हैं। किंतु इस कार्रवाई पर सवालिया निशान भी लग रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है, कि जब चारों तरफ महाकाल मिनरल्स का हो हल्ला हो रहा है तो इस ओर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। नदी बचाओ आंदोलन के प्रमुख सदस्य और समाजसेवी रवि सेन ने इन कार्रवाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा है, कि यह कार्रवाई सीमित और प्रतीकात्मक प्रतीत होती है, जिससे जिले में बड़े पैमाने पर हो रहे कथित अवैध रेत उत्खनन के मामलों से ध्यान भटकाया जा सकता है।

लंबित शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं...?

रवि सेन ने बताया कि वर्षाकाल के बाद से ही कथित रेत ठेकेदार बाबा महाकाल मिनरल्स द्वारा जिले की जीवनदायिनी नदियों ग्राम पंचायत चन्सुरा स्थित जरवाही नदी, ग्राम पंचायत पड़वार-सलैया स्थित हलफल-भदार नदी एवं ग्राम पंचायत अमिलिया स्थित सोन नदी में नियम विरुद्ध उत्खनन की शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिकायतों पर अब तक कोई विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही प्रशासन की ओर से स्पष्ट स्थिति बताई गई है।

उन्होंने बताया कि हलफल नदी घाट क्षेत्र में अवैध उत्खनन के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों एवं समाज सेवियों के साथ अनिश्चित कालीन धरना दिया गया था। प्रशासन द्वारा दस दिनों में जांच का आश्वासन देने के बाद आंदोलन स्थगित किया गया, किंतु लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद कोई निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

रॉयल्टी और अनुमति पर पारदर्शिता हो

नदी बचाओ आंदोलन के प्रमुख सदस्य रवि सेन का आरोप है कि रेत उत्खनन हेतु कई किलोमीटर लंबी अस्थायी सड़कों का निर्माण मुरूम एवं बोल्डर डालकर किया गया है। हजारों हाइवा मुरूम की रॉयल्टी और उत्खनन अनुमति संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की मांग की गई है, ताकि कानून के प्रति जनता का विश्वास बना रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा है, कि यदि लंबित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो एक व्यापक जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अब देखना यह है, कि उमरिया जिला प्रशासन द्वारा विवादित नदी क्षेत्रों से संबंधित शिकायतों पर आधिकारिक स्थिति कब तक स्पष्ट की जाती है।


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