मोहम्मद सईद
शहडोल 12 फरवरी। नदी का सीना चीरकर अवैध रूप से रेत का उत्खनन करने से परेशान ग्रामीणों और समाजसेवियों ने अब एक बार फिर शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। शहडोल संभाग अंतर्गत उमरिया जिले के ग्राम पंचायत पड़वार के हलफल-भादर नदी में कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन के मामले में प्रशासनिक आश्वासन के बावजूद कार्रवाई न होने पर नदी बचाओ आंदोलन ने दोबारा मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। आंदोलनकारियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानूनों, खनिज नियमों और न्यायालयीन निर्देशों की खुली अवहेलना बताते हुए 16 फरवरी 2026 से सलैया घाट, पड़वार रोड स्थित बरगद वृक्ष के नीचे अनिश्चितकालीन सामूहिक धरना शुरू करने की औपचारिक सूचना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मानपुर को दे दी है।
बाबा महाकाल मिनरल्स कर रहा उत्खनन
मानपुर क्षेत्र के समाजसेवी रवि सेन ने आरोप लगाया है, कि ग्राम पंचायत पड़वार अंतर्गत हलफल-भादर नदी में रेत ठेकेदार बाबा महाकाल मिनरल्स द्वारा बिना वैध प्रक्रिया, नियमों और निर्धारित शर्तों का पालन किए अवैध उत्खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उमरिया जिले के रेत ठेकेदार बाबा महाकाल मिनरल्स के इस कृत्य केविरोध में 23 जनवरी से स्थानीय ग्रामीणों, समाज सेवियों और पर्यावरणविदों के साथ अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ किया गया था। आंदोलन के दबाव में जिला कलेक्टर उमरिया के निर्देश पर तहसीलदार मानपुर ने 25 जनवरी को रात 8 बजे मौके पर पहुंचकर ज्ञापन प्राप्त किया और विधिसम्मत जांच व कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया था। आंदोलन कारियों का कहना है, कि धरना समाप्त होने के बाद आज दिनांक तक न तो कोई पारदर्शी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाई गई। उनका आरोप है कि इसके विपरीत नदी से रेत निकासी लगातार जारी है, जो शासन की निष्क्रियता और संरक्षण पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए-रवि सेन
समाजसेवी रवि सेन ने कहा है, कि यदि प्रशासन ने तत्काल वैधानिक कार्रवाई करते हुए अवैध खनन पर रोक, जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार पर दंडात्मक कार्यवाही तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की, तो 16 फरवरी को दोपहर 1 बजे से शुरू होने वाला धरना अनिश्चितकालीन रूप लेगा। मांगों की अनदेखी की स्थिति में आमरण अनशन भी किया जाएगा, जिसकी समस्त नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है, कि उनका आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रहेगा, किंतु पर्यावरणीय क्षति और राजस्व हानि को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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