मोहम्मद सईद
शहडोल 6 फरवरी। गुजरात फॉरेस्ट रेंजर्स कॉलेज, राजपीपला से फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर प्रशिक्षु अधिकारियों का बहु-राज्यीय दल बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में तकनीकी अध्ययन भ्रमण पर आया था। इस दल में मध्यप्रदेश, गुजरात एवं कर्नाटक कैडर के प्रशिक्षु वन परिक्षेत्र अधिकारी सम्मिलित थे। जैव विविधता संरक्षण, दीर्घकालीन प्रबंधन रणनीतियों एवं सफल संरक्षण मॉडल के अध्ययन हेतु बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का चयन किया गया। यह संपूर्ण अध्ययन भ्रमण क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व डॉ. अनुपम सहाय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अध्ययन भ्रमण के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने कोर एवं बफर क्षेत्र का भ्रमण किया, जिसमें 5 बाघों का प्रत्यक्ष अवलोकन भी इन्होंने किया। इस अवसर पर अधिकारियों को बाघ आवास प्रबंधन, शाकाहारी वन्यजीवों के लिए घासभूमि विकास, जल स्रोत प्रबंधन, अग्नि प्रबंधन, तथा दीर्घकालीन मॉनिटरिंग तंत्र की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई।
इन जानकारी को साझा किया
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि तकनीकी सत्रों के अंतर्गत वन्य जीव अपराधों की रोकथाम हेतु अपनाई जा रही रणनीतियाँ, इंटेलिजेंस आधारित गश्त प्रणाली, एम-STRiPES गस्ती, ड्रोन/कैमरा ट्रैप आधारित निगरानी, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण उपाय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (RRT), मुआवजा एवं जनसहभागिता मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त गौर (Gaur) ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम, बारासिंगा पुनर्स्थापन परियोजना, आनुवंशिक विविधता संरक्षण, प्रजाति-विशिष्ट प्रबंधन एवं पोस्ट-रिलीज़ मॉनिटरिंग जैसे विषयों पर विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा की गई।
उप संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व द्वारा समग्र परिदृश्य-आधारित (Landscape based) प्रबंधन दृष्टिकोण, अंतर-राज्यीय समन्वय एवं सतत संरक्षण रणनीतियों पर संदेश दिया। ताला, मगधी एवं पर्यटन परिक्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारियों द्वारा पॉवर पॉइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से क्षेत्रीय प्रबंधन, पर्यटन नियमन एवं आगंतुक प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षु अधिकारियों ने बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के वैज्ञानिक, तकनीक-आधारित एवं समुदाय-केंद्रित संरक्षण मॉडल की सराहना की तथा इसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।



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