मोहम्मद सईद
शहडोल 7 फरवरी। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का दावा करने वाली सरकारी व्यवस्था जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। जिले के जनपद पंचायत गोहपारू के अंतर्गत ग्राम पंचायत बरमनिया के पंचायत भवन में अधिकांश समय ताला लटका नजर आता है। लंबे समय से कुंडली मारे बैठे ग्राम पंचायत बरमनिया के सचिव राजेश साहू कार्यालय से नदारद रहते हैं, जिसके कारण अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आने वाले ग्रामीणों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है। अनेको ग्रामीण ऐसे भी हैं, जिन्होंने पंचायत के निर्माण कार्यों में काम तो कर लिया, लेकिन उन्हें भुगतान अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।
लाभ से वंचित पात्र हितग्राही
ग्राम पंचायत बरमनिया के ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन खुलने का कोई निश्चित समय नहीं है। सचिव के नियमित रूप से कार्यालय न आने के कारण ग्रामीणों के महत्वपूर्ण कार्य जैसे मृत्यु-जन्म प्रमाण पत्र, पेंशन आवेदन और मनरेगा से जुड़े काम पूरी तरह रुक गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत सचिव राजेश साहू बरेली गांव में रहते हैं और वह वहां से मनमाना तरीके से आना-जाना करते हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सचिव जब नहीं आते और उन्हें फोन लगाया जाता है तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव की मनमानी के सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के पात्र लोगों तक नहीं पहुँच पा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है, कि सचिव राजेश साहू पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से यहां डटे हुए हैं जबकि नियमानुसार उन्हें 3 साल के बाद स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए था। कुछ ग्रामीणों ने दबी जुबान में यह भी बताया कि सचिव राजेश साहू चार पहिया माल वाहक वाहन ले लिए हैं और उसी के व्यवसाय में ज्यादातर समय बरेली में डटे रहते हैं।
भुगतान के लिए भटक रहे ग्रामीण
ग्राम पंचायत बरमानिया के वार्ड क्रमांक 4 में रहने वाली श्रीमती नेम बाई ने बताया कि उन्होंने रोजगार गारंटी के तहत लघु तालाब निर्माण में मिट्टी खुदाई का कार्य किया था। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें 36 दिन की मजदूरी अभी तक नहीं मिली है। नेम बाई ने बताया कि मजदूरी भुगतान के संबंध में सचिव द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी तरह वार्ड क्रमांक 4 के अशोक सिंह ने बताया कि रोजगार गारंटी के तहत उन्होंने मेढ़ बंधान का कार्य किया था, लेकिन उनकी तीन सप्ताह की मजदूरी अभी तक नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि सचिव द्वारा इस संबंध में कुछ भी सुनवाई नहीं की जा रही है। वार्ड क्रमांक 6 के निवासी राम रतन पनिका ने अपने पेंशन के लिए आवेदन तो दे दिया, लेकिन अब पेंशन प्राप्त करने के लिए वह पिछले 6 माह से भटक रहे हैं।
हटाने के लिए लिखा, पर नहीं हुई कार्रवाई
ग्राम पंचायत बरमानिया के सरपंच दल प्रताप सिंह से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्ष से ज्यादा समय से राजेश साहू यहां सचिव के तौर पर नियुक्त हैं। सरपंच श्री सिंह ने बताया कि सचिव नियमित कार्यालय नहीं आते हैं जिसके चलते ग्राम के विकास कार्यों में असर पड़ रहा है और लोगों को शासकीय योजनाओं का सही तौर पर लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरपंच श्री सिंह ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने कई बार मौखिक रूप से और लिखित में भी सचिव राजेश साहू को यहां से हटाने के संबंध में जनपद पंचायत के अधिकारियों को दिया है, लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
तो फिर किस बात का वेतन
अब सबसे बड़ा सवाल यह है, कि क्या सचिव को जनता की सेवा के लिए वेतन मिलता है या कार्यालय में ताला लटका कर गायब रहने के लिए....? इस 'नदारद संस्कृति' के पीछे आखिर किसका संरक्षण है...? देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग से जुड़े अधिकारी अब इस दिशा में क्या कार्रवाई करते हैं।



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