मोहम्मद सईद
मण्डला 10 मई। असम के जंगली भैंसों की गर्जना, अब कान्हा में भी गूंजेगी। जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत गत दिवस कान्हा टाइगर रिजर्व मण्डला के सुपखार परिक्षेत्र में असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से चार जंगली भैंसों को लाकर विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सफलता पूर्वक मुक्त किया गया है। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीमती समिता राजोरा और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एल. कृष्णमूर्ति द्वारा जंगली भैंसों को बाड़े में निर्मुक्त किया गया। इस मौके पर क्षेत्र संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक (कोर) प्रकाश कुमार वर्मा और उप संचालक बफर सुश्री अमिथा केबी. के साथ ही सभी सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी और कान्हा टाइगर रिजर्व का क्षेत्रीय अमला भी उपस्थित रहा। उप संचालक (कोर) प्रकाश कुमार वर्मा ने "खबरें अभीतक" को बताया कि मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसा लगभग 150 वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा जंगली भैंसा को पुनः स्थापित करने हेतु एक विशेष योजना तैयार की गई है। इसी क्रम में कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार क्षेत्र, जहाँ पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं, जहां असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से जंगली भैंसों को लाकर पुनर्स्थापित करने की परियोजना क्रियान्वित की जा रही है।
उप संचालक श्री वर्मा ने बताया कि इस परियोजना के प्रथम चरण में 28 अप्रैल को चार जंगली भैंसों को सुपखार स्थित बाड़े में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुक्त किया गया था। अब द्वितीय चरण के तहत चार और जंगली भैंसों को सफलतापूर्वक लाया गया है। इस प्रकार अब तक कुल 8 जंगली भैसा जिसमें 2 नर औऱ 06 मादा सम्मलित हैं, पुनः बसाये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 3 वर्षो में कुल 50 जंगली भैसा को पुनः स्थापित किये जाने का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि काजीरंगा टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व तक लगभग 2220 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से तय की गई। इस दौरान विशेष वन्य जीव परिवहन वाहनों में दो वन्य जीव चिकित्सकों की टीम द्वारा सतत निगरानी एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता रहा। साथ ही एक सहायक संचालक एवं एक परिक्षेत्र अधिकारी ने पूरे दल का नेतृत्व किया। वाहन चालकों एवं दल के सदस्यों ने लगभग 72 घंटे का अनवरत सफर पूर्ण कर जंगली भैंसों के सुरक्षित परिवहन में सफलता प्राप्त की।
महत्वपूर्ण पहले सिद्ध होगा
संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व रविंद्र मणि त्रिपाठी का कहना है, कि यह पुनर्स्थापना कार्यक्रम मध्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण एवं विलुप्त प्राय वन्य जीव प्रजातियों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगा।




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