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ई-टोकन प्रणाली किसानों के लिए बनीं परेशानी

मोहम्मद सईद

शहडोल 6 मई। प्रदेश शासन द्वारा खाद के लिए लागू की गई ई टोकन प्रणाली अब ग्रामीण किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। किसानों की इसी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए मंडला जिले के बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रणाली को शिथिल किए जाने की मांग की है। मंडला जिले के बिछिया से विधायक नारायण सिंह पट्टा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि खाद वितरण की 'E-टोकन प्रणाली' में सुधार एवं आदिवासी किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जाए।

डिजिटल जागरूकता का अभाव 

विधायक श्री पट्टा ने पत्र में उल्लेख किया है, कि मेरे विधानसभा क्षेत्र बिछिया (जिला मंडला) के कृषक वर्तमान में खाद वितरण हेतु लागू 'E-टोकन प्रणाली" के कारण अत्यंत विकट समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बिछिया एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहाँ डिजिटल जागरूकता का अभाव है। क्षेत्र के लगभग 30-40 प्रतिशत किसानों की भूमि अभी तक आधार से लिंक नहीं हो पाई है, जिससे वे टोकन प्रक्रिया से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि क्षेत्र की हजारों एकड़ भूमि नर्मदा जी के किनारे (कछार) में स्थित है। पानी का बहाव कम होने पर किसान यहाँ सब्जी एवं अन्य फसलें उगाते हैं। चूंकि यह शासकीय भूमि (कछार) कहलाती है, इसलिए 'E-प्रणाली' में ऐसे किसानों का डेटा दर्ज नहीं है, जिससे उन्हें खाद प्राप्त करने में वैधानिक बाधा आ रही है।

आजीविका प्रभावित होगी

विधायक श्री पट्टा का कहना है, कि यदि खाद वितरण की प्रक्रिया को सरल नहीं बनाया गया, तो फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आएगी, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। किसानों में इस जटिल प्रक्रिया को लेकर निरंतर आक्रोश बढ़ रहा है। अतः क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए E-टोकन प्रणाली में शिथिलता प्रदान की जाए। साथ ही कछार में खेती करने वाले और आधार लिंक से वंचित किसानों के लिए वैकल्पिक ऑफ लाइन खाद वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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