शहडोल 5 मई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र में टाइगर के हमले में एक आदिवासी व्यक्ति की मौत को लेकर मानपुर क्षेत्र की जनपद सदस्य सुश्री रोशनी सिंह ने गहरी चिंता जताई है। गौरतलब है कि कुदरी निवासी 55 वर्षीय रज्जू कोल महुआ संग्रहण के लिए जंगल गए थे, कि तभी टाइगर ने उन पर हमला कर दिया जिससे उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न
वार्ड क्रमांक 11 से जनपद सदस्य सुश्री रोशनी सिंह ने मृतक रज्जू कोल के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि ये घटना एक बार फिर वन क्षेत्र से लगे गांवों में रहने वाले आदिवासी एवं ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। सुश्री सिंह का कहना है कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की आजीविका लंबे समय से जंगल एवं लघु वनोपज पर आधारित रही है। महुआ, तेंदूपत्ता एवं अन्य वन उपज उनके जीवन यापन का महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और वन क्षेत्र से जुड़े समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन एवं वन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं तथा जंगली जानवरों के हमलों में कई लोगों की जान जाने की घटनाओं ने स्थानीय नागरिकों में भय और असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न किया है। ऐसी घटनाओं के बाद केवल एक व्यक्ति की जान नहीं जाती, बल्कि कई परिवारों का भविष्य भी गहरे संकट में पड़ जाता है। जिन परिवारों के कमाऊ सदस्य असमय इस तरह की घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं, उनके बच्चों के सामने शिक्षा, पालन-पोषण और सुरक्षित भविष्य का गंभीर प्रश्न खड़ा हो जाता है। जनपद सदस्य सुश्री सिंह ने यह भी कहा है, कि रज्जू कोल की मृत्यु के बाद उनके परिवार, पत्नी एवं बच्चों के समक्ष भी आजीविका, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। एक परिवार के कमाऊ सदस्य की असमय मृत्यु केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक क्षति भी है। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाना किसी भी आर्थिक सहायता से पूरी तरह भरपाई नहीं किया जा सकता। वन विभाग द्वारा नियमानुसार प्रदान की जाने वाली लगभग 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तात्कालिक राहत का माध्यम हो सकती है, किंतु किसी परिवार के मुखिया की कमी की पूर्ति केवल आर्थिक सहायता से संभव नहीं है। प्रभावित परिवार के दीर्घकालिक पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा एवं आजीविका सुरक्षा पर भी गंभीरता से कार्य किया जाना आवश्यक है।
इन मांगों को पूरा किया जाए
जनपद सदस्य सुश्री सिंह ने प्रशासन एवं बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन से मांग की जा कि मृतक परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता एवं नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। मृतक परिवार के एक पात्र सदस्य को नियमानुसार रोजगार, स्वरोजगार सहायता अथवा अन्य आजीविका समर्थन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। मृतक के बच्चों की शिक्षा एवं परिवार के पुनर्वास हेतु विशेष सहायता सुनिश्चित की जाए। पनपथा बफर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी, गश्त एवं सूचना तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। वन क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों एवं आदिवासी परिवारों के लिए सुरक्षा जागरूकता और जोखिम न्यूनीकरण की ठोस कार्ययोजना लागू की जाए। स्थानीय समुदायों एवं वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय एवं संवाद व्यवस्था विकसित की जाए।
तो किया जाएगा जन-आंदोलन
जनपद सदस्य सुश्री सिंह ने यह भी कहा है, कि यदि आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम, ग्रामीणों की सुरक्षा तथा प्रभावी प्रबंधन के लिए ठोस और परिणामकारी कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो जनहित में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जन-आंदोलन करने पर विचार किया जाएगा।

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