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सुरों और शब्दों की संगम बनी काव्य संगीत संध्या

मोहम्मद सईद

बिलासपुर 11 मई। काव्य भारती कला संगीत मंडल बिलासपुर द्वारा रविवार को संस्था के संस्थापक स्वर्गीय मनीष दत्त जी की जयंती के अवसर पर स्थानीय प्रार्थना भवन, टाउन हॉल के पास भावपूर्ण एवं सुरमयी काव्य संगीत संध्या का आयोजन किया गया। लगभग दो घंटे तक चले इस आत्मीय आयोजन में काव्य भारती के वरिष्ठ एवं नवोदित कलाकारों ने काव्य-संगीत और काव्य-नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में डॉ. सुप्रिया भारतीयन, डॉ. रत्ना मिश्रा, डॉ. किरण बाजपेयी, श्रीमती रीना पॉल, श्रीमती दीप्ति मेहता, हर्षिता, कृष्णा, युवराज शौर्य, धैर्य, कान्हा, अद्वैत एवं अभ्युदय ने अपनी गायन प्रस्तुतियों से संध्या को सुरमयी बनाया। तबले पर श्री एस. भारतीयन एवं धैर्य ने प्रभावशाली संगत दी।

इन प्रस्तुतियों ने भी समा बांधा

श्रीमती सविता कुशवाहा के नेतृत्व में पूर्वी, पल्लवी, सृष्टि एवं प्रशस्ति ने निराला और श्रीकृष्ण सरल के गीतों पर मनोहारी काव्य-नृत्य प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। कार्यक्रम में महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, जयशंकर प्रसाद, हरिवंशराय बच्चन, शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, सोहनलाल द्विवेदी, सूरदास, मीराबाई, कबीर एवं जयदेव के साथ-साथ श्रीकांत वर्मा, रामप्रताप सिंह विमल और डॉ. अजय पाठक की रचनाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर निराला का नाचो हे नाचो नटवर, महादेवी वर्मा की दीप मेरे जल अकंपित एवं सब आँखों के आँसू उजले, सुभद्रा कुमारी चौहान की आ रही हिमाचल से पुकार, नागार्जुन की अबकी मैंने जी भर देखी पकी सुनहली फसलों की मुस्कान, हरिवंशराय बच्चन का तुम गा दो मेरा गान अमर हो जाए, रामप्रताप सिंह विमल की सर हमारा झुका है नमन के लिए, श्रीकांत वर्मा की चर्चित रचना मेरी माँ की डबडब आँखें, डॉ. अजय पाठक की इस समर में कौन तांडव कर गया है तथा शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की सलोनी सावनी संध्या जैसी कालजयी रचनाओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी गईं।

स्मृतियों को साझा किया

कार्यक्रम के दौरान मनीष दत्त जी से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. विजय सिन्हा, डॉ. विनय पाठक, सतीश जायसवाल और श्रीमती भारती भट्टाचार्य सहित अन्य सुधी श्रोताओं ने उनके रचनात्मक व्यक्तित्व और आत्मीय स्वभाव को याद किया। आचार्य ए.डी.एन. बाजपेयी ने अपने उद्बोधन में कलाकारों को मनीष दत्त जी की रचनात्मक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। संस्था के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश बाजपेयी ने भी मनीष दत्त जी से जुड़े अपने जीवन के रोचक संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं भावपूर्ण संचालन काव्य भारती की वरिष्ठ कलाकार डॉ. सुप्रिया भारतीयन ने किया। पूरे आयोजन में साहित्य, संगीत और संवेदनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला तथा उपस्थित श्रोताओं ने कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

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