मोहम्मद सईद
शहडोल 26 अगस्त। वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने तथा नव-नियुक्त वनकर्मियों को वन्यजीव सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन की आधुनिक तकनीकों से दक्ष करने के उद्देश्य से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला स्थित ईको सेंटर में 24 एवं 25 अगस्त को दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न वन मंडलों से आए प्रशिक्षु वनरक्षकों को गश्ती रणनीति, वन्यजीव अपराध की रोकथाम, अपराध स्थल की जांच, साक्ष्य संरक्षण, कानून, फॉरेंसिक, मानवाधिकार, वन्यजीव बचाव एवं सूचना प्रबंधन सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
यह प्रशिक्षण प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश, भोपाल डॉ. समीता राजोरा के मार्गदर्शन में विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं के सामूहिक प्रयास से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य देश के वन प्रशिक्षण संस्थानों में वन्यजीव सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन से जुड़े उन्नत और आधुनिक प्रशिक्षण को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल विकसित करना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान यह विशेष जोर दिया गया कि वनरक्षकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण स्तर पर ही वन्यजीव अपराधों की पहचान, रोकथाम, वैज्ञानिक जांच, साक्ष्यों के संरक्षण, कानूनी प्रक्रिया, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, मानवाधिकार और लैंगिक समानता जैसे विषयों की व्यावहारिक समझ प्रदान की जाए।
मैदानी वनकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रशिक्षण का शुभारंभ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने किया। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता में मैदानी वनकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल गश्ती और निगरानी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि वन्यजीव अपराध की पहचान, वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, सही दस्तावेजीकरण, कानून की जानकारी और विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय भी जरूरी है। क्षेत्र संचालक डॉ. सहाय ने प्रशिक्षु वनरक्षकों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशल को मैदानी कार्यों में प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।
गश्ती से अपराध स्थल की जांच तक प्रशिक्षण
पहले दिन महावीर पांडेय परिक्षेत्र अधिकारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने गश्ती की रणनीति पर प्रशिक्षण देते हुए प्रभावी गश्ती योजना, क्षेत्र में सतर्कता, दल के बीच समन्वय और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की तकनीक समझाई। शुभम मिश्रा, RO, STSF ने वन्यजीव अपराधों की रोकथाम एवं योजना विषय पर जानकारी देते हुए अवैध शिकार और अन्य वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए निगरानी, पूर्व योजना और प्रभावी कार्यप्रणाली के बारे में बताया। पंकज शर्मा, RO, STSF ने अपराध स्थल की जांच विषय पर प्रशिक्षण दिया। इसमें घटनास्थल को सुरक्षित रखने, महत्वपूर्ण साक्ष्यों की पहचान करने तथा वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से जांच करने की प्रक्रिया समझाई गई।
वहीं विपिन लकड़ा, Deputy RO, STSF ने साक्ष्यों की सुरक्षित श्रृंखला (Chain of Custody) के महत्व को समझाया। उन्होंने साक्ष्यों के सुरक्षित रख-रखाव, दस्तावेजीकरण, हस्तांतरण और जांच के दौरान उनकी विश्वसनीयता बनाए रखने की प्रक्रिया पर व्यावहारिक जानकारी दी।
अनिरुद्ध मजूमदार, Scientist एवं अन्य JRF, SFRI द्वारा मानचित्र एवं दिशा ज्ञान पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को क्षेत्र की सही पहचान, दिशा निर्धारण और मैदानी कार्यों में मानचित्र के प्रभावी उपयोग की तकनीक समझाने के साथ इसका व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। अंतिम सत्र में अमर नाथ चौधरी, Program Manager, GTF ने वन्यजीव संबंधी सूचनाओं के दस्तावेजीकरण, अभिलेखीकरण एवं आदान-प्रदान विषय पर प्रशिक्षण दिया।
मानवाधिकार तक समझाई गई जिम्मेदारी
दूसरे दिन उप संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व योहान कटारा की उपस्थिति में प्रथम दिवस के सत्रों का पुनरावलोकन कराया गया। प्रतिभागियों से संवाद करते हुए पिछले दिन सीखी गई महत्वपूर्ण जानकारियों को दोहराया गया। आर.के. सिंह, सलाहकार, WWF-India ने वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रमुख कानून एवं नियम विषय पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने वन्यजीव अपराधों से जुड़े प्रमुख कानूनी प्रावधानों, उनके प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायिक कार्रवाई में वनकर्मियों की भूमिका को विस्तार से समझाया। डॉ. निधि राजपूत, Associate Professor, SWFH ने वन्यजीव फॉरेंसिक पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण से प्रशिक्षु वनरक्षकों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के संरक्षण और जांच की प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ मिली।
वन्यजीव बचाव और शव परीक्षण की भी दी जानकारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर ने वन्यजीव बचाव, शव परीक्षण एवं उससे जुड़ी चुनौतियों पर जानकारी दी।



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