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बांधवगढ़ की "बाघिन" अब राजस्थान के मुकुंदरा में करेगी राज

मोहम्मद सईद

शहडोल 27 फरवरी। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू की गई बाघिन को शुक्रवार को विशेष वाहन से राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिज़र्व के लिए रवाना किया गया है। 7 सौ किलोमीटर का सफर लगभग 16 से 20 घंटे में तय कर यह बाघिन मुकुंदरा हिल टाइगर रिज़र्व पहुंचेगी। बाघिन के इस सफर में वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी के साथ वन अधिकारियों की एक पूरी टीम भी मौजूद है। वन्य जीव संरक्षण एवं प्रबंधन की दृष्टि से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस स्थानांतरण से राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में न सिर्फ बाघों की संख्या बढ़ेगी बल्कि वहां के वन्य जीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी। यह कदम बाघों के सुरक्षित आवास और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय से मिली जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की प्रबंधन टीम के द्वारा परिक्षेत्र पनपथा बफर की जगुआ बीट से लगभग 3.5 वर्ष आयु की एक बाघिन को वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी की टीम द्वारा ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित एवं सफलता पूर्वक रेस्क्यू किया गया। इसके बाद रेस्क्यू विशेषज्ञ, वन्य जीव स्वास्थ्य अधिकारी व चिकित्सकों द्वारा बाघिन का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया जिसमें बाघिन पूर्णतः स्वस्थ पाई गई। डॉ. सहाय ने बताया कि आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रिया पूर्ण करते हुए बाघिन को सुरक्षित रूप से रेडियो कॉलर पहनाया गया और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक जैविक सैंपल भी संकलित किए गए। 

दो विकल्प पर किया था विचार

क्षेत्र संचालक डॉ. सहाय ने यह भी बताया कि बाघिन को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व कोटा राजस्थान भेजने के लिए सड़क और वायु मार्ग दोनों पर विचार कर आवश्यक तैयारी की गई थी। पूर्ण रूप से विचार करने तथा वरिष्ठ से प्राप्त मार्गदर्शन के बाद बाघिन को सड़क मार्ग से विशेष परिवहन वाहन के माध्यम से राजस्थान भेजने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इस मादा बाघिन को बांधवगढ़ से सुरक्षित रूप से रवाना किया गया है। वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, उप वनमंडल अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी तथा अन्य वन्य कर्मचारियों का एक विशेष दल भी साथ में मौजूद है।

एक माह तक की निगरानी

ऐसा नहीं है, कि इस बाघिन को अचानक से रेस्क्यू कर राजस्थान के लिए रवाना कर दिया गया। क्योंकि निर्धारित मापदंड के अनुसार कुछ बाघिनों की पिछले एक महीने से निगरानी की जा रही थी। क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर की अध्यक्षता में तथा उप संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की उपस्थिति में रेस्क्यू दल, बीटीआर के सभी उप वन मंडल अधिकारियों तथा परिक्षेत्र अधिकारियों की समीक्षा बैठक की गई तथा रेस्क्यू हेतु विस्तृत दिशा निर्देश के अनुसार इस बाघिन को ट्रांसलोकेशन के लिए सही पाया गया। इसके बाद ही तय प्रक्रिया अनुसार इस मादा बाघिन का प्रबंधन टीम द्वारा सफल व सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है, कि भारत में बाघों के संरक्षण और प्रबंधन की निगरानी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है, कि इस तरह के प्रयास भविष्य में बाघों की संख्या और उनके सुरक्षित आवास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


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