शहडोल, 9 अगस्त। जिले में नए कलेक्टर के रूप में पार्थ जायसवाल के पदभार ग्रहण करने के साथ ही प्रशासनिक कामकाज में कसावट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। महज चंद दिनों के भीतर खनिज, परिवहन तथा खाद्य सुरक्षा प्रशासन की सक्रियता ने यह संदेश देना शुरू कर दिया है, कि अब शिकायतों और अनियमितताओं को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पहले जैसी सुस्त नहीं रहने वाली। शहडोल कलेक्टर के रूप में पार्थ जायसवाल ने 4 अगस्त की देर शाम पदभार ग्रहण किया था। इसके अगले ही दिन, 5 अगस्त को दोपहर बाद, उन्होंने जिले के पत्रकारों से चर्चा कर जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। इस दौरान पत्रकारों ने जिले में पिछले कुछ महीनों से अधिकारियों की सुस्त कार्य प्रणाली, रेत का वैध ठेका न होने के बावजूद बड़े पैमाने पर हुए रेत के उत्खनन और परिवहन, बारिश के दौरान जगह-जगह किए गए रेत के अवैध भंडारण सहित खाद्य एवं औषधि, स्वास्थ्य तथा अन्य विभागों की बातों को कलेक्टर के सामने रखा था। कलेक्टर श्री जायसवाल ने पत्रकारों को भरोसा दिलाया था कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब इस आश्वासन का असर प्रशासनिक स्तर पर दिखाई देने लगा है। शनिवार को जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी किए गए तीन अलग-अलग समाचारों में खनिज, परिवहन तथा खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण सामने आया है। इन कार्रवाइयों को महज विभागीय गतिविधि मानने के बजाए नए प्रशासनिक नेतृत्व के शुरुआती असर के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यवाही...1 रेत का विनष्टीकरण
खनिज विभाग और ब्यौहारी एसडीएम की संयुक्त टीम ने अवैध रूप से संग्रहित रेत के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अवैध रेत को नष्ट किया। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने ब्यौहारी तहसील के रेत के अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ब्यौहारी सुश्री अर्चना मिश्रा को कार्यवाही करने के निर्देश दिए। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सुश्री अर्चना मिश्रा एवं जिला खनिज अधिकारी राहुल शाडिल्य ने बताया कि तहसील ब्यौहारी अंतर्गत ग्राम खड़ोली, ग्राम पंचायत नौढ़िया में खनिज एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम शासकीय भूमि पर भण्डारित लगभग 50 घनमीटर खनिज रेत का विनिष्टीकरण किया गया।
कार्यवाही...2 स्कूली वाहनों की जांच
प्रभारी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी संतोष पॉल द्वारा 24 स्कूली वाहनों के दस्तावेज, फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र की जांच की गई तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। अनियमिततां पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए वाहन मालिकों के विरूद्व 7 हजार रुपए का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया।
कार्यवाही...3 खाद्य पदार्थाें का सैम्पल
खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने बुढ़ार में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया एवं लाइसेंस व साफ सफाई की जांच की। बुढ़ार संजय स्वीट्स को बिना वैद्य लाइसेंस के खाद्य व्यापार करते पाए जाने पर प्रकरण बनाया गया। राकेश ट्रेडिंग से हल्दी मिर्च व धनिया पाउडर के नमूने लिए गए। शहडोल में कविता फूड प्रोडक्ट्स व आनंद बेकरी की जांच कर नमकीन सेव, ब्रेड, पाव, काजू, कतरी, नान खटाई के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच हेतु भेजा गया है। चौपाटी में एमएफटीएल की सहायता से जांच कर 25 नमूने जांचे गए और स्टेडियम के पास फास्ट फूड की दुकानों की जांच कर स्वच्छता हेतु निर्देश दिए गए।
पूर्व में रहे हैं चर्चाओं में
जिले का खनिज अमला सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहा है। रेत का ठेका न होने के बाद भी धड़ल्ले से शहर में रेत लेकर आते हुए वाहन खनिज विभाग को नजर नहीं आते थे। जब मीडिया में हो हल्ला मचता तब खनिज विभाग तत्काल कागजी खानापूर्ति की कार्रवाई कर अपनी पीठ खुद थपथपाने लग जाता था। खनिज विभाग और माफिया के बीच नूरा कुश्ती की भी चर्चा बनी रहती थी। प्रभारी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी भी पूर्व में रस्म अदायगी के लिए शहडोल आए थे। अब उनके द्वारा की गई यह पहली कार्यवाही है। इसी तरह खाद्य सुरक्षा विभाग में पूर्व में यहां पदस्थ रहे अधिकारी सिर्फ त्यौहार के मौसम में ही नजर आते थे और बाकी दिनों वह प्रतिष्ठानों में बैठे नजर आते थे। इस विभाग में अभी हाल ही में नए अधिकारी पदस्थ हुए हैं।
निरंतरता और निष्पक्षता जरूरी
पिछले कुछ समय से जिले में आम धारणा यह बनती जा रही थी कि कई विभागों के अधिकारी शिकायतों और अनियमितताओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। कार्रवाई होती भी थी तो कई बार वह इतनी सीमित होती थी कि उसका वास्तविक प्रभाव जमीन पर नजर नहीं आता था। ऐसे में नए कलेक्टर के पदभार संभालने के बाद विभागीय अमले की सक्रियता को प्रशासनिक कसावट की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। सबसे अहम बात यह है, कि पत्रकारों के साथ कलेक्टर पार्थ जायसवाल की चर्चा और समस्याओं की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराए जाने के महज तीन दिन के भीतर संबंधित विभागों की गतिविधियां जमीन पर दिखाई देने लगी हैं। इससे प्रशासनिक हलकों में यह संदेश जरूर गया है कि अब फाइलों में कार्रवाई दिखाने के बजाए मौके पर कार्रवाई करने की अपेक्षा की जा रही है। हालांकि शुरुआती कार्रवाई को लेकर यह भी जरूरी है, कि प्रशासन सिर्फ दिखावटी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि कार्रवाई की निरंतरता और निष्पक्षता भी बनाए रखे, तभी आम लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत होगा।




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