मोहम्मद सईद
शहडोल 28 अगस्त। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। इस पर्व पर बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। लेकिन शहडोल संभाग के उमरिया जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण के संकल्प के साथ कुछ अलग ही अंदाज में मनाया गया।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ महिला वन कर्मियों ने इस बार पेड़ों को अपना भाई मानकर उन्हें रक्षा सूत्र बांधा। महिला वन कर्मियों ने पूरे रीति-रिवाज और श्रद्धा के साथ पेड़ों को तिलक लगाया, आरती उतारी और उनकी कलाई के प्रतीक स्वरूप शाखाओं पर राखी बांधकर प्रकृति के साथ अपने आत्मीय रिश्ते का संदेश दिया।
जब पेड़ बने भाई और वनकर्मी बनीं बहनें
रक्षाबंधन के इस अनूठे आयोजन में महिला वन कर्मियों ने वृक्षों के प्रति अपनी संवेदनाओं को एक नए रूप में अभिव्यक्त किया। जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी भावना के साथ महिला वन कर्मियों ने वृक्षों के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया। तिलक और आरती के बाद जब पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधा गया तो यह दृश्य केवल एक पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच सदियों पुराने रिश्ते की जीवंत तस्वीर बन गया। महिला वन कर्मियों ने संदेश दिया कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार हैं।
वन कर्मियों की गहरी संवेदना आई सामने
बांधवगढ़ के जंगलों में दिन-रात वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे वनकर्मियों का पेड़ों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। महिला वन कर्मियों की इस पहल ने इसी संवेदना को एक सांस्कृतिक स्वरूप दिया। रक्षा बंधन जैसे पारंपरिक पर्व को वन संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जोड़कर महिला वनकर्मियों ने समाज के सामने यह संदेश रखने का प्रयास किया कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
क्षेत्र संचालक ने की सराहना
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने महिला वन कर्मियों की इस अनूठी पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि वन एवं वृक्षों के महत्व को त्योहारों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने से समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जन संवेदना को मजबूती मिलती है।
उन्होंने रेखांकित किया कि जब लोगों का जुड़ाव जंगल, वृक्ष और वन्यजीवों से भावनात्मक रूप से बढ़ेगा, तो इसका सकारात्मक प्रभाव वन संरक्षण पर भी पड़ेगा। संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के इस मेल से नई पीढ़ी को प्रकृति के महत्व को समझने और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
एक पौधा लगाने की अपील
क्षेत्र संचालक डॉ. सहाय ने इस अवसर पर आमजन से एक महत्वपूर्ण अपील भी की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वन एवं वृक्ष प्राणवायु देकर हमारे प्राणों की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को रक्षाबंधन के पर्व पर कम से कम एक पौधा लगाकर उसे रक्षा सूत्र बांधना चाहिए और जीवनभर उसकी रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। यदि रक्षाबंधन के इस भाव को व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया जाए और प्रत्येक परिवार हर वर्ष एक पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी ले, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।



0 Comments