मोहम्मद सईद
शहडोल 16 अगस्त। पुलिस सेवा में कर्तव्यनिष्ठा, तेज-तर्रार कार्यशैली और पारदर्शिता के लिए पहचान बनाने वाले लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में पदस्थ डीएसपी वीरेंद्र सिंह को सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित भव्य एवं गरिमामय समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। डीएसपी वीरेंद्र सिंह के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके पिता स्वर्गीय राम नरेश सिंह इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) में इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दे चुके हैं और उन्हें भी सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया था। पिता के बाद पुत्र को भी इसी प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जाना परिवार के लिए गौरव का विषय है।

1989 में शुरू हुआ पुलिस सेवा का सफर
डीएसपी वीरेंद्र सिंह वर्ष 1989 में पुलिस सेवा में भर्ती हुए। एक वर्ष के प्रशिक्षण के बाद वर्ष 1990 में उनकी पहली पदस्थापना बतौर सब इंस्पेक्टर टीकमगढ़ में हुई। इसके बाद उन्होंने शिवपुरी, कांकेर (वर्तमान छत्तीसगढ़) और मंडला सहित विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं।
शहडोल से रहा गहरा जुड़ाव
डीएसपी वीरेंद्र सिंह का शहडोल से भी पुराना और गहरा नाता रहा है। वर्ष 2003 में सब इंस्पेक्टर के रूप में उनका स्थानांतरण अविभाजित शहडोल जिले में हुआ, जहां उन्हें अनूपपुर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में शहडोल और अनूपपुर के अलग-अलग जिले बनने के बाद उनकी पदस्थापना शहडोल जिले में हुई। वर्ष 2003 से 2006 तक उन्होंने जैतपुर और देवलोंद थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इन पद स्थापनाओं के दौरान उनकी कार्यशैली और प्रभावी पुलिसिंग की पहचान बनी। इसके बाद उनका तबादला भोपाल हो गया।
निरीक्षक से डीएसपी तक का सफर
वर्ष 2011 में निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के बाद उनकी पदस्थापना भोपाल ईओडब्ल्यू में हुई। इसके बाद उन्होंने विदिशा, रायसेन, भोपाल और सीहोर में भी अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2023 में उन्हें डीएसपी पद पर पदोन्नत किया गया और लोकायुक्त भोपाल में पदस्थापना मिली। वर्तमान में भी वह लोकायुक्त भोपाल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
“बाबूजी के कदमों पर चला,
इसलिए मिला यह सम्मान”
राष्ट्रपति पदक मिलने पर डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने इसे अपने माता-पिता के आशीर्वाद और सहयोगियों की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि “बाबूजी के कदमों पर चलते हुए उनकी तरह सराहनीय सेवाओं के लिए मुझे भी यह सम्मान मिला है।” उन्होंने कहा कि माता-पिता के आशीर्वाद के साथ-साथ उनके वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सहयोगियों के सहयोग के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। उन्होंने इस सम्मान के लिए सभी वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया है। पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुत्र को भी राष्ट्रपति पदक मिलना निश्चित रूप से कर्तव्य, संस्कार और समर्पण की विरासत की गौरवपूर्ण कहानी है।
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