मोहम्मद सईद
शहडोल 19 जनवरी। हमारे यहां संयुक्त परिवार का चलन रहा है, लेकिन आज इसमें कमी आ रही है जिसके कारण वृद्ध जन एकाकी होने लगे हैं। सीनियर सिटीजन एसोसिएशन जैसी संस्था वरिष्ठ जन और निर्धन लोगों की सेवा कर रही है, यह बहुत खुशी की बात है। रविवार को सीनियर सिटीजन एसोसिएशन द्वारा आयोजित बुजुर्गों के हितार्थ न्यायिक परामर्श हेतु न्यायाधीशों के विचार सृजन कार्यक्रम में जिला प्रधान व सत्र न्यायाधीश श्री काशीनाथ सिंह ने मुख्य अतिथि की आसंदी से यह विचार व्यक्त किए। श्री सिंह ने बुजुर्गों के लिए लागू कानून के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अनुच्छेद 41 में राज्य पर यह दायित्व सौंपा गया है, कि वह अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार वृद्ध जनों के कल्याण के योजनाएं संचालित करें। उन्होंने बताया है कि सभी वृद्ध जनों के पास सीनियर सिटिजन कार्ड का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस कार्ड से ही शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि न्यायालय में दावा प्रस्तुत करते वक्त यदि इस कार्ड का उल्लेख किया गया तो कोर्ट में सुनवाई भी त्वरित होगी। बुजुर्गों के आवेदन पर 90 दिनों में कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। साथ ही असंतुष्ट होने पर उन्हें वसीयत को रद्द करवाने का भी अधिकार दिया गया है।
वरिष्ठ न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री सीताशरण यादव ने अपने संबोधन में कहा कि बुजुर्ग जन परिवार का खजाना होते हैं और पढ़ाई से ज्यादा ज्ञान व अनुभव उनसे प्राप्त होता है। वर्तमान समय में लोग परिवार के वरिष्ठ जनों को समय नहीं दे रहे हैं, इसीलिए बुजुर्गों के हितों की रक्षा करने के लिए वर्ष 2007 में एक अधिनियम बनाया गया है। जिसके तहत बुजुर्गों के देखरेख, भरण पोषण, चिकित्सा एवं आवास व्यवस्था के लिए कानूनी प्रावधान किया गया है। बुजुर्गों की उपेक्षा करने वालों के खिलाफ एफआईआर भी हो सकती है और 3 माह के कारावास का भी प्रावधान है। उन्होंने बुजुर्गों से अपील की कि अपनों से नाराज होना बंद कर दे और सभी को क्षमा करें, क्योंकि शक्तिशाली और बड़ा वही होता है जिसमें क्षमा करने का गुण होता है।
जिला विधिक सेवा अधिकारी देवेश सिंह ने अपने उद्बोधन ने कहा कि बुजुर्ग अपने जीवन में जो भी अर्जित करते हैं। वह अपने अनुभव, ज्ञान और विशेषता को परिजनों और दोस्तों से से शेयर जरूर करें, ताकि भावी पीढ़ी को इसका लाभ मिल सके और भावी पीढ़ी उनके जीवन को आत्मसात कर सके। उन्होंने बताया कि सीनियर सिटीजन के सम्मान में कानूनी प्रावधान बने हैं और उनके हितों की रक्षा करने के लिए सरकार व प्रशासन सदैव तत्पर रहते है। मजिस्ट्रेट श्रीमती प्रीति सिंह बघेल ने भी कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। संस्था के वरिष्ठ सदस्य महेश अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम का सफल संचालन एसोशिएशन के सह सचिव अरुण अग्रवाल ने किया। जबकि अंत में सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष छोटेलाल सरावगी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान आज जो कानूनी जानकारियां मिली है निश्चित ही हमारे लिए लाभकारी है और हम इस जानकारी से अन्य लोगों को अवगत कराएंगे। इससे पूर्व सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के अध्यक्ष एम एल मंत्री ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि संस्था की स्थापना 2005 में दैनिक भारती के संपादक कैलाश चंद्र अग्रवाल ने की थी। तब से लेकर अब तक संस्था द्वारा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को खुशियां बांटने का काम किया जा रहा है। वर्तमान में संस्था में 33 सदस्य हैं।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के सदस्य, मातृशक्ति और गणमन नागरिक उपस्थित रहे।



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