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बांधवगढ़ लाए गए इंडियन बायसन, बढ़ रहा कुनबा

मोहम्मद सईद

शहडोल 23 जनवरी। भारतीय बायसन कहे जाने वाले वन्य प्राणी गौर को एक बार फिर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लाया गया है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से ट्रांसलोकेट कर लाए जाने वाले कुल 50 गौर में से द्वितीय चरण के पहले दिन 5 गौर को शुक्रवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कलवाह परिक्षेत्र में निर्मित गौर बाड़े में सफलतापूर्वक छोड़ा गया है। इसमें एक नर और चार मादा गौर शामिल हैं। शनिवार को आठ गौर और बांधवगढ़ आ रहे हैं, जिन्हें बाड़ा में छोड़ा जाएगा। इन गौर के आ जाने से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणी गौर का कुनबा बढ़ता जा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने "खबरें अभी तक" को बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर ट्रांसलोकेशन के दूसरे चरण की सफल शुरुआत शुक्रवार को हो गई। उक्त गौर को 22 जनवरी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम द्वारा वहां की क्षेत्र संचालक श्रीमती राखी नंदा तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम के नेतृत्व में चूरना के पास स्थित वन क्षेत्र से कैप्चर किया गया था। 

उन्होंने बताया कि गौर परिवहन के लिए 09 परिवहन दल गठित किए गए हैं और प्रत्येक दल में एक उप वनमंडल अधिकारी, वन क्षेत्रपाल, एक गौर परिवहन वाहन, दो वन्य प्राणी चिकित्सक, वनपाल एवं वनरक्षक सहित कुल 10 सदस्य तथा 4 वाहन शामिल हैं। क्षेत्र संचालक ने बताया कि इन सभी गौर को लगभग एक माह तक बाड़ा में रखा जाएगा और जब यह झुंड के रूप में हो जाएंगे तब इन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा। 

क्षेत्र संचालक डॉक्टर सहाय ने बताया कि गौर ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन के द्वितीय चरण में कुल 27 गौरों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इससे पहले फरवरी 2025 में 22 गौर को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलता पूर्वक पुनर्स्थापित किया जा चुका हैं। वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौरों की संख्या 191 से अधिक हो चुकी है। यह संपूर्ण अभियान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर जनसंख्या को सुदृढ़ करने तथा आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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