शहडोल, 24 फरवरी। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय के पूर्व कार्य समिति सदस्य कैलाश तिवारी ने विश्वविद्यालय की दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय में जिस तरह से शिक्षण कार्य चल रहा है उससे परीक्षा परिणाम दिसंबर माह में जारी किए जा रहे हैं। छात्रों को आने-जाने के लिए 5 या 6 बसों के माध्यम से 10 हजार छात्रों को प्रतिदिन आने जाने की सुविधा का दावा किया जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर के छात्रावास बंद है। आदिवासी बहुल क्षेत्र के आदिवासी छात्र विश्वविद्यालय में महाविद्यालय से ज्यादा फीस देने को मजबूर हैं ऐसे में क्या विश्वविद्यालय ठीक चल रहा है, ये दावा किया जा सकता है।
नौकरी की जगह, बेरोजगार घूम रहे
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश तिवारी ने कहा कि शहडोल संभाग वालो को आशा थी कि विश्वविद्यालय बन जाने से छात्रों को एक अच्छी शिक्षण संस्था मिलेगी, लेकिन उन्हें बहुत निराशा हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा जितनी खुलेआम मनमानी की जा रही है, कहीं अन्य नहीं देखी जा रही है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशों का पालन नहीं किया जाकर अभी तक गैर शैक्षणिक पदों की भर्ती प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है। जिन उम्मीदवारों को पात्रता मिल गई है, उन्हें नौकरी करनी चाहिए थी लेकिन वह बेरोजगार घूम रहे हैं।
उच्च स्तरीय जांच हो
श्री तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय की दीक्षांत समारोह में पधार रहे राज्यपाल महोदय का स्वागत है लेकिन यह दीक्षा समारोह सभी सार्थक होगा जब दीक्षा पद्धति ठीक ढंग से चल रही होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के आदिवासी नेता माननीय मंगू भाई पटेल जी को मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया था, तो लोगों को आशा थी कि आदिवासियों के विकास के ठोस कार्य होंगे लेकिन राजपाल महोदय द्वारा शिकायतों पर आज तक ध्यान नहीं दिए जाने पर गहन निराशा है। कैलाश तिवारी ने माननीय राजपाल से निवेदन किया है, कि वह विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ की गई शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच करें अन्यथा आने वाली पीढ़ी इस अन्याय को हमेशा याद रखेगी।

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