मोहम्मद सईद
शहडोल 14 जून। जंगली हाथियों और मानव संघर्ष की रोकथाम तथा वन्य जीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन कर्मचारियों को पश्चिम बंगाल में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हाथियों के व्यवहार, निगरानी और संघर्ष प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों से पांच वनकर्मी प्रशिक्षित हुए हैं। उत्तरी पश्चिम बंगाल में जंगली हाथी प्रबंधन एवं मानव-हाथी द्वंद्व रोकथाम पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन रक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता एवं रवि कुमार वर्मा ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस प्रशिक्षण में उत्तरी पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल होने वाले असरदार टूल्स और तकनीकों का प्रैक्टिकल अनुभव दिया गया। इसमें हाथियों को वापस जंगल भेजने के ऑपरेशन, मॉनिटरिंग के तरीके (जैसे ट्रांसेक्ट सर्वे और गोबर का विश्लेषण), हाथियों का व्यवहार, कैम्प हाथियों का मैनेजमेंट और शारीरिक बनावट के आधार पर हाथियों की प्रोफ़ाइलिंग शामिल थी।
इसके अतिरिक्त गोरुमारा वाइल्ड लाइफ़ डिवीज़न, कर्सिओंग वाइल्ड लाइफ़ डिवीज़न, बैकुंठपुर डिवीज़न और जलपाईगुड़ी डिवीज़न के अधिकारियों, फ्रंटलाइन स्टाफ़, वाइल्ड लाइफ़ स्क्वाड, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय समुदाय के सदस्यों के साथ गहन चर्चा के ज़रिए प्रतिभागियों को स्थानीय समुदाय की भागीदारी और कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालने और उससे निपटने की रणनीतियों के बारे में भी जानकारी मिली।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि कि बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में विगत लगभग 8 वर्षों से हाथियों का विचरण बना हुआ है और अब बाँधवगढ़ जंगली हाथियों के लिए स्थाई रहवास बन चुका है जो कि बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के स्वस्थ पारिस्थितिकीय तंत्र का सूचक है। परंतु साथ ही साथ बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व अंतर्गत एवं उससे लगे हुए ग्रामों के समीप हाथियों के विचरण से एक गंभीर चुनौती भी पेश कर रहा है। इसके दृष्टिगत हाथियों के विषय मे अंतरराज्यीय प्रशिक्षण प्राप्त करने से निश्चित ही जंगली हाथी प्रबंधन एवं मानव-हाथी द्वंद्व रोकथाम को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।


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