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बाघों की धरती से इंसानियत का संदेश, वनकर्मियों ने किया 29 यूनिट रक्तदान

मोहम्मद सईद 

शहडोल 31 जुलाई। संभाग अंतर्गत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्य जीव संरक्षण के साथ-साथ मानव सेवा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। बाघ दिवस के मौके पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारी और कर्मचारियों ने 29 यूनिट रक्तदान कर समाज सेवा का प्रेरणादायी संदेश देने के साथ ही 29 जुलाई को यादगार बना दिया।
रक्तदान अभियान में क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। खास बात यह रही कि यह पहल केवल वन विभाग तक सीमित नहीं रही, बल्कि बांधवगढ़ से जुड़े जिप्सी चालक और स्थानीय ग्रामीणों ने भी रक्तदान किया।


रक्तदाताओं में यह शामिल 
रक्तदान करने वालों में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र सचालक डॉ. अनुपम सहाय 
के साथ ही भूरा गायकवाड़ अधीक्षक पनपथा अभ्यारण्य, मितेन्द्र चिचखेड़े सहायक संचालक, डॉ.राजेश तोमर वन्य प्राणी स्वास्थ अधिकारी, सचिन सिंह परिक्षेत्र अधिकारी धमोखर, प्रतीक श्रीवास्तव परिक्षेत्र अधिकारी पनपथा बफर, अंकित सोनी परिक्षेत्र अधिकारी मानपुर बफर,  महावीर पाण्डेय परिक्षेत्र अधिकारी कल्लवाह, रमेश सिंह पाटले परिक्षेत्र अधिकारी पनपथा कोर और वनरक्षक उमंग उपाध्याय, शिवकरण बैगा, राजेश लोधी, मयूर यादव, भूपेन्द्र रावत, सत्येन्द्र सिंह राजावत, भागवत तिवारी, अर्जुनदास बैगा, धीरेन्द्र शुक्ला, मोहित खटीक, राजकुमार प्रजापति, निखिल शुक्ला, अभेय परांजये डब्ल्यू सी टी संस्था मुम्बई, सुरक्षा श्रमिक रामानुज यादव, रामखेलावन केवट, जयप्रकाश तिवारी, दादूलाल यादव, नगीना सिंह, पंकज कुमार मांझी जिप्सी ड्राइवर पर्यटन और ग्रामीण नितिन बर्मन ताला शामिल हैं। रक्तदान में जिला अस्पताल उमरिया के ब्लड बैंक अधिकारी डॉ. मुकुल तिवारी, वीरेंद्र शर्मा, विनीत साहू, प्रेमप्रकाश यादव और राजकुमार यादव भी उपस्थित रहे। सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।

जिंदगी बचाने की मानवीय सेवा-डॉ. सहाय

इस अवसर पर क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि रक्तदान किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को बचाने वाली मानवीय सेवा है। बाघ दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर रक्तदान कर बांधवगढ़ परिवार ने यह संदेश दिया है कि वन्यजीवों की रक्षा के साथ मानव जीवन की सुरक्षा और सेवा भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इस पहल के जरिए यह भी साबित किया है कि जंगल बचाने वाले हाथ जरूरत पड़ने पर जिंदगी बचाने के लिए भी आगे आते हैं।

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