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शहडोल जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय, शुरू हुई लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

मोहम्मद सईद

शहडोल 13 अगस्त। शहडोल संभाग के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। शासकीय जिला चिकित्सालय शहडोल में अब आधुनिक लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी की सुविधा शुरू हो गई है। संभाग के किसी भी शासकीय जिला अस्पताल में अब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसके चलते मरीजों को लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन के लिए दूसरे शहर और या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब जिला अस्पताल में ही आधुनिक तकनीक से कई प्रकार की सर्जरी संभव हो सकेगी। शासकीय जिला चिकित्सालय शहडोल में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की शुरुआत केवल एक नई चिकित्सा सुविधा का आरंभ नहीं, बल्कि संभाग की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीकी उन्नयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

भोपाल से प्राप्त किया प्रशिक्षण 

जिला चिकित्सालय शहडोल में इस आधुनिक सुविधा की शुरुआत में चिकित्सालय में पदस्थ जनरल सर्जन डॉ. अपूर्व पाण्डेय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने भोपाल से लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का विशेष कोर्स एवं प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनके प्रशिक्षण के बाद अब जिला अस्पताल में इस आधुनिक तकनीक का लाभ मरीजों को मिलना शुरू हो गया है।

पहली लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सफल

जिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर में गुरुवार को इस सुविधा के तहत पहली सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अपूर्व पाण्डेय ने लगभग 55 वर्षीय महिला की पित्त की थैली में मौजूद पथरी का दूरबीन पद्धति से सफल ऑपरेशन किया। डॉ. पाण्डेय के अनुसार ऑपरेशन में करीब 50 मिनट का समय लगा। मिनिमल एक्सेस तकनीक से किए गए इस ऑपरेशन में बड़े चीरे के बजाय करीब एक-एक सेंटीमीटर के दो छोटे चीरे लगाए गए।
बताया गया कि महिला की पित्त की थैली में कई पथरियां मौजूद थीं, जिनमें सबसे बड़ी पथरी का आकार लगभग 9 सेंटीमीटर था। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत सामान्य है। डॉ. पाण्डेय के अनुसार शुक्रवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी और वह सामान्य दिनों की तरह अपने काम कर सकेगी।

इन बीमारियों की होगी सर्जरी

जिला चिकित्सालय में अब मरीजों को कई प्रकार की मिनिमल एक्सेस सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि
पित्त की थैली की पथरी (Gall Bladder Stone), अपेंडिक्स (Appendicitis)
ओवरी की गांठ (Ovarian Cyst),
लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी यानी बच्चेदानी का ऑपरेशन और पेट से संबंधित अन्य कई रोगों की सर्जरी शामिल हैं।
छोटा चीरा, कम दर्द और जल्दी छुट्टी
डॉ. पाण्डेय ने बताया कि लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में कई मामलों में मरीज के लिए सुविधाजनक माना जाता है। इसमें छोटे चीरे लगाए जाते हैं, साथ ही संक्रमण का खतरा कम रहने, घाव जल्दी भरने और मरीज के कम समय में सामान्य गतिविधियों में लौटने जैसे लाभ मिलते हैं।
शासकीय जिला चिकित्सालय शहडोल के जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अपूर्व पाण्डेय ने लोगों से अपील की है, कि यदि उन्हें अथवा उनके किसी परिचित को पित्त की पथरी, अपेंडिक्स, ओवरी की गांठ अथवा ऐसी अन्य बीमारी है, जिसमें लैप्रोस्कोपिक सर्जरी संभव है, तो जिला चिकित्सालय में उपलब्ध इस आधुनिक सुविधा का लाभ लें।

सिविल सर्जन ने जताई प्रसन्नता

जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने भी अस्पताल में लैप्रोस्कोपिक दूरबीन सर्जरी की शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सुविधा के शुरू होने से शहडोल संभाग के मरीजों को बेहतर और आधुनिक सर्जिकल उपचार स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा। तथा उन्हें इलाज के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी।

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